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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 39 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 2

3.39.2

Mantra ID: 3.39.2

दि॒वश्चि॒दा पू॒र्व्या जाय॑माना॒ वि जागृ॑विर्वि॒दथे॑ श॒स्यमा॑ना । भ॒द्रा वस्त्रा॒ण्यर्जु॑ना॒ वसा॑ना॒ सेयम॒स्मे स॑न॒जा पित्र्या॒ धीः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.39.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! सूर्योदय से भी पहले यज्ञ में की गई स्तुति तुम्हारा जागरण करती हुई कल्याणकारिणी, शुक्लवस्त्रधारिणी, सनातन एवं हमारे पितरों के पास से आई है. (२)

EN English Translation

O Indra! The praise made in the yagna even before sunrise has come from kalyanini, shuklavastradharini, sanatan and our fathers, awakening you. (2)

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