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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 10 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 10 • ऋचा / मन्त्र 5

4.10.5

Mantra ID: 4.10.5

तव॒ स्वादि॒ष्ठाग्ने॒ संदृ॑ष्टिरि॒दा चि॒दह्न॑ इ॒दा चि॑द॒क्तोः । श्रि॒ये रु॒क्मो न रो॑चत उपा॒के ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.10.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम्हारा प्रियतम प्रकाश रात-दिन अलंकार के समान पदार्थो के समीप आकर शोभा पाता है. (५)

EN English Translation

O agni! Your beloved light comes close to objects like ornaments day and night. (5)

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