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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 17 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 17 • ऋचा / मन्त्र 7

4.17.7

Mantra ID: 4.17.7

त्वमध॑ प्रथ॒मं जाय॑मा॒नोऽमे॒ विश्वा॑ अधिथा इन्द्र कृ॒ष्टीः । त्वं प्रति॑ प्र॒वत॑ आ॒शया॑न॒महिं॒ वज्रे॑ण मघव॒न्वि वृ॑श्चः ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.17.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने पूर्वकाल में उत्पन्न होकर वृत्र के भय से सभी प्रजाओं की रक्षा की थी. तुमने स्थलों को जलपूर्ण करने के उद्देश्य से जलनिरोधक वृत्र को वज्र से काट दिया था. (७)

EN English Translation

O Indra! You originated in the past and protected all the people from the fear of Vritra. You cut off the anti-water vritra with a thunderbolt with the aim of watering the sites. (7)

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