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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 17 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 17 • ऋचा / मन्त्र 9

4.17.9

Mantra ID: 4.17.9

अ॒यं वृत॑श्चातयते समी॒चीर्य आ॒जिषु॑ म॒घवा॑ श‍ृ॒ण्व एकः॑ । अ॒यं वाजं॑ भरति॒ यं स॒नोत्य॒स्य प्रि॒यासः॑ स॒ख्ये स्या॑म ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.17.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धन के स्वामी इंद्र संग्रामों में अद्वितीय सुने जाते हैं. वे एकत्र शत्रु सेनाओं को नष्ट कर देते हैं एवं यजमानों को देने योग्य अन्न को धारण करते हैं. हम इंद्र के मित्र बनकर प्रिय हों. (९)

EN English Translation

The lord of wealth is heard uniquely in indra sangrams. They destroy the enemy armies gathered and hold on to the food they can give to the hosts. Let us be dear to Indra's friends. (9)

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