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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 23 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 6

4.23.6

Mantra ID: 4.23.6

किमादम॑त्रं स॒ख्यं सखि॑भ्यः क॒दा नु ते॑ भ्रा॒त्रं प्र ब्र॑वाम । श्रि॒ये सु॒दृशो॒ वपु॑रस्य॒ सर्गाः॒ स्व१॒॑र्ण चि॒त्रत॑ममिष॒ आ गोः ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.23.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम यजमान शत्रुओं का पराभव करने वाले तुम्हारी मैत्री एवं भ्रातृ प्रेम को अपने मित्र स्तोताओं से कब कहेंगे? इंद्र के सभी उद्योग स्तोताओं के कल्याण के लिए होते हैं. सूर्य के समान गतिशील इंद्र के सुंदर शरीर को सभी चाहते हैं. (६)

EN English Translation

O Indra! When will we tell our friend hymns about your friendship and fraternal love who have defeated host enemies? All the industries of Indra are meant for the welfare of the stoetas. The beautiful body of Indra, similar to the sun dynamic, all want. (6)

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