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4.25.2
को ना॑नाम॒ वच॑सा सो॒म्याय॑ मना॒युर्वा॑ भवति॒ वस्त॑ उ॒स्राः । क इन्द्र॑स्य॒ युज्यं॒ कः स॑खि॒त्वं को भ्रा॒त्रं व॑ष्टि क॒वये॒ क ऊ॒ती ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.25.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
कौन यजमान सोमरस के पात्र इंद्र को स्तुति रूपी वचन से नमस्कार करता है? कौन इंद्र की स्तुति की कामना करता है? इंद्र द्वारा दी हुई गायों को कौन रखता है? कौन इंद्र की सहायता चाहता है? कीन इंद्र के साथ मित्रता अथवा भाईचारा रखने का इच्छुक है? कौन क्रांतदर्शी इंद्र से रक्षा की प्रार्थना करता है? (२)
EN English Translation
Who greets Indra, the character of the host Somras, with a word of praise? Who wishes to praise Indra? Who keeps the cows given by Indra? Who wants Indra's help? Is Keen willing to have friendship or brotherhood with Indra? Who prays for protection from the revolutionary Indra? (2)