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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 30 • Mantra / Rik 19

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 19

4.30.19

Mantra ID: 4.30.19

अनु॒ द्वा ज॑हि॒ता न॑यो॒ऽन्धं श्रो॒णं च॑ वृत्रहन् । न तत्ते॑ सु॒म्नमष्ट॑वे ॥ (१९)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.30.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वृत्रनाशक इंद्र! तुमने सभी संबंधियों द्वारा त्यागे गए अंधे और लूले पर कृपा की थी. तुम्हारे द्वारा दिए हुए सुख को कोई नष्ट नहीं कर सकता. (१९)

EN English Translation

O the conqueror Indra! You were kind to the blind and lulle abandoned by all the relatives. No one can destroy the happiness you have given. (19)

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