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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 30 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 2

4.30.2

Mantra ID: 4.30.2

स॒त्रा ते॒ अनु॑ कृ॒ष्टयो॒ विश्वा॑ च॒क्रेव॑ वावृतुः । स॒त्रा म॒हाँ अ॑सि श्रु॒तः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.30.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! प्रजाएं तुम्हारे पीछे उसी प्रकार चलें, जिस प्रकार गाड़ी सभी जगह पहिए के पीछे जाती है. हे इंद्र! तुम वास्तव में महान्‌ एवं प्रसिद्ध हो. (२)

EN English Translation

O Indra! Let the people follow you in the same way as the car goes behind the wheel everywhere. O Indra! You are really great and famous. (2)

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