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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 31 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 31 • ऋचा / मन्त्र 11

4.31.11

Mantra ID: 4.31.11

अ॒स्माँ इ॒हा वृ॑णीष्व स॒ख्याय॑ स्व॒स्तये॑ । म॒हो रा॒ये दि॒वित्म॑ते ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.31.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम इस यज्ञ में हम यजमानों को मित्रता, अविनाशी भाव एवं दीप्तिशाली महान्‌ धन का भागी बनाओ. (११)

EN English Translation

O Indra! In this yajna, make us hosts a partaker of friendship, indestructible spirit and glorious great wealth. (11)

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