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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 31 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 31 • ऋचा / मन्त्र 15

4.31.15

Mantra ID: 4.31.15

अ॒स्माक॑मुत्त॒मं कृ॑धि॒ श्रवो॑ दे॒वेषु॑ सूर्य । वर्षि॑ष्ठं॒ द्यामि॑वो॒परि॑ ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.31.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सर्वप्रेरक इंद्र! देवों में हमारा यश उसी प्रकार उत्कृष्ट बनाओ, जिस प्रकार तुमने वर्षा करने में सक्षम आकाश को सभी लोगों के ऊपर धारण किया है. (१५)

EN English Translation

O all-inspiring Indra! Make our glory among the gods excellent in the same way that you have put the sky capable of raining above all people. (15)

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