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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 31 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 31 • ऋचा / मन्त्र 3

4.31.3

Mantra ID: 4.31.3

अ॒भी षु णः॒ सखी॑नामवि॒ता ज॑रितॄ॒णाम् । श॒तं भ॑वास्यू॒तिभिः॑ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.31.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम मित्ररूप स्तोताओं के रक्षक बनकर अनेक प्रकार से रक्षा करते हुए हम लोगों के सामने आओ. (३)

EN English Translation

O Indra! You as protectors of friendly hymns and come before us in many ways, protecting us. (3)

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