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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 31 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 31 • ऋचा / मन्त्र 5

4.31.5

Mantra ID: 4.31.5

प्र॒वता॒ हि क्रतू॑ना॒मा हा॑ प॒देव॒ गच्छ॑सि । अभ॑क्षि॒ सूर्ये॒ सचा॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.31.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम यज्ञकर्म के स्थान में अपना स्थल जानकर ही आते हो. हम सूर्य के साथ तुम्हें स्मरण करते हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! You come to the place of yajnakarma only knowing your place. We remember you with the sun. (5)

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