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4.32.21
भू॒रि॒दा ह्यसि॑ श्रु॒तः पु॑रु॒त्रा शू॑र वृत्रहन् । आ नो॑ भजस्व॒ राध॑सि ॥ (२१)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.32.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे वृत्रनाशक एवं शूर इंद्र! तुम बहुत से यजमानों में अधिक देने वाले के रूप में प्रसिद्ध हो. तुम हमें धन का भागी बनाओ. (२१)
EN English Translation
O vrithrashakta and shur indra! You're famous as the giver more in many hosts. You make us partakers of the wealth. (21)