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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 32 • Mantra / Rik 23

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 23

4.32.23

Mantra ID: 4.32.23

क॒नी॒न॒केव॑ विद्र॒धे नवे॑ द्रुप॒दे अ॑र्भ॒के । ब॒भ्रू यामे॑षु शोभेते ॥ (२३)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.32.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारे पीले रंग के घोड़े यज्ञ में इस प्रकार सुशोभित होते हैं, जिस प्रकार दृढ़, नए एवं छोटे से वृक्ष में सुंदर कठपुतली छिपे रूप में शोभा पाती हैं. (२३)

EN English Translation

O Indra! Your yellow horses adorn in the yajna in such a way that beautiful puppets are adorned in the form of a firm, new and small tree. (23)

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