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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 38 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 38 • ऋचा / मन्त्र 1

4.38.1

Mantra ID: 4.38.1

उ॒तो हि वां॑ दा॒त्रा सन्ति॒ पूर्वा॒ या पू॒रुभ्य॑स्त्र॒सद॑स्युर्नितो॒शे । क्षे॒त्रा॒सां द॑दथुरुर्वरा॒सां घ॒नं दस्यु॑भ्यो अ॒भिभू॑तिमु॒ग्रम् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.38.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे द्यावा-पृथ्वी! प्राचीन काल में त्रसदस्यु नामक राजा ने धन पाकर मांगने वाले लोगों को दिया था. तुमने उसे घोड़ा, पुत्र एवं दस्युजनों को नष्ट करने योग्य बल दिया था. (१)

EN English Translation

This is the earth! In ancient times, a king named Trasadsyu gave money to the people who were asking for money. You gave him the strength to destroy the horse, the son and the bandits. (1)

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