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4.39.2
म॒हश्च॑र्क॒र्म्यर्व॑तः क्रतु॒प्रा द॑धि॒क्राव्णः॑ पुरु॒वार॑स्य॒ वृष्णः॑ । यं पू॒रुभ्यो॑ दीदि॒वांसं॒ नाग्निं द॒दथु॑र्मित्रावरुणा॒ ततु॑रिम् ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.39.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यज्ञकर्म करने वाला मैं महान्, बहुतों द्वारा इच्छित एवं कामवर्षी दधिक्रा देव की स्तुति करता हूं. हे मित्र व वरुण! तुम दोनों रक्षा करने वाले एवं अग्नि की तरह प्रकाशयुक्त दधिक्रा देव को मानवों के कल्याण के लिए धारण करते हो. (२)
EN English Translation
I praise the great, many who perform yajna karma and the work-year-old Dadhikra Dev. O friend and Varun! Both of you wear Dadhikra Dev, who protects and lights like agni, for the welfare of human beings. (2)