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4.5.12
किं नो॑ अ॒स्य द्रवि॑णं॒ कद्ध॒ रत्नं॒ वि नो॑ वोचो जातवेदश्चिकि॒त्वान् । गुहाध्व॑नः पर॒मं यन्नो॑ अ॒स्य रेकु॑ प॒दं न नि॑दा॒ना अग॑न्म ॥ (१२)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.5.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इस धन का साधनरूप धन क्या है? हितकर धन क्या है? हे जातवेद! तुम इस बात को जानते हो, इसलिए हमें बताओ. धन प्राप्ति के मार्ग का गूऴ उपाय भी हमें बताओ. हम निंदा के पात्र बने बिना गंतव्य स्थान को पा सकें. (१२)
EN English Translation
What is the money as a means of this money? What is beneficial money? O Jathaveda! You know this, so tell us. Also tell us the determining way of getting money. We can find the destination without being condemned. (12)