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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 52 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 5

4.52.5

Mantra ID: 4.52.5

प्रति॑ भ॒द्रा अ॑दृक्षत॒ गवां॒ सर्गा॒ न र॒श्मयः॑ । ओषा अ॑प्रा उ॒रु ज्रयः॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.52.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्रशंसा के योग्य किरणें दिखाई देती हैं. उषा ने संसार को वर्षा की धारा के समान तेज से भर दिया है. (५)

EN English Translation

Rays worthy of praise appear. Usha has filled the world with as much as the current of rain. (5)

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