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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 54 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 54 • ऋचा / मन्त्र 1

4.54.1

Mantra ID: 4.54.1

अभू॑द्दे॒वः स॑वि॒ता वन्द्यो॒ नु न॑ इ॒दानी॒मह्न॑ उप॒वाच्यो॒ नृभिः॑ । वि यो रत्ना॒ भज॑ति मान॒वेभ्यः॒ श्रेष्ठं॑ नो॒ अत्र॒ द्रवि॑णं॒ यथा॒ दध॑त् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.54.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उदित हुए सविता देव की हम शीघ्र ही वंदना करेंगे. मनुष्य इस समय अर्थात्‌ प्रातः एवं तृतीय सवन में होतागण सूर्य की स्तुति करें. जो सविता मानवों को रक्त प्रदान करते हैं, वे हमें इस यज्ञ में उत्तम धन दें. (१)

EN English Translation

We will soon worship savita dev who has risen. Let man praise the sun at this time i.e. in the morning and in the third suture. The Savitas who provide blood to human beings, give us the best wealth in this yagna. (1)

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