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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 57 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 57 • ऋचा / मन्त्र 3

4.57.3

Mantra ID: 4.57.3

मधु॑मती॒रोष॑धी॒र्द्याव॒ आपो॒ मधु॑मन्नो भवत्व॒न्तरि॑क्षम् । क्षेत्र॑स्य॒ पति॒र्मधु॑मान्नो अ॒स्त्वरि॑ष्यन्तो॒ अन्वे॑नं चरेम ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.57.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ओषधियां, द्युलोक, जल-समूह, आकाश एवं क्षेत्रपति हमारे लिए मधुयुक्त हों. हम शत्रुओं की हिंसा से बचकर उनके पीछे चलें. (३)

EN English Translation

May the medicines, the people, the water groups, the sky and the region be the beeeching for us. Let us avoid the violence of our enemies and follow them. (3)

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