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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 57 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 57 • ऋचा / मन्त्र 7

4.57.7

Mantra ID: 4.57.7

इन्द्रः॒ सीतां॒ नि गृ॑ह्णातु॒ तां पू॒षानु॑ यच्छतु । सा नः॒ पय॑स्वती दुहा॒मुत्त॑रामुत्तरां॒ समा॑म् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.57.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र सीता को ग्रहण करें एवं पूषा उसकी रक्षा करें. धरती जलपूर्ण बनकर हमें आने वाले वर्षो में फसलें दें. (७)

EN English Translation

Take Indra and Sita and Pusha protect her. Let the earth become watery and give us crops in the years to come. (7)

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