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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 58 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 1

4.58.1

Mantra ID: 4.58.1

स॒मु॒द्रादू॒र्मिर्मधु॑मा॒ँ उदा॑र॒दुपां॒शुना॒ सम॑मृत॒त्वमा॑नट् । घृ॒तस्य॒ नाम॒ गुह्यं॒ यदस्ति॑ जि॒ह्वा दे॒वाना॑म॒मृत॑स्य॒ नाभिः॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.58.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

गायों के थन से दूध की मधु भरी धाराएं निकलती हैं. मनुष्य उनके कारण मरणरहित बनते हैं. घृत का नाम रक्षणीय इसीलिए है कि वह देवों की जीभ एवं अमृत का केंद्र है. (१)

EN English Translation

Honey-filled streams of milk come out of the cows' trunks. Human beings become deathless because of them. The name of the ghrit is protectable because it is the tongue of the gods and the center of the nectar. (1)

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