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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 8 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 8 • ऋचा / मन्त्र 2

4.8.2

Mantra ID: 4.8.2

स हि वेदा॒ वसु॑धितिं म॒हाँ आ॒रोध॑नं दि॒वः । स दे॒वाँ एह व॑क्षति ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.8.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वे महान्‌ अग्नि यजमान के धन का दान हैं एवं स्वर्ग की सीढ़ियों को जानते हैं. वे देवों को इस यज्ञ में लावें. (२)

EN English Translation

They are the gift of the wealth of the great agni host and know the stairs of heaven. Let them bring the gods to this yagna. (2)

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