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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 25 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 8

5.25.8

Mantra ID: 5.25.8

तव॑ द्यु॒मन्तो॑ अ॒र्चयो॒ ग्रावे॑वोच्यते बृ॒हत् । उ॒तो ते॑ तन्य॒तुर्य॑था स्वा॒नो अ॑र्त॒ त्मना॑ दि॒वः ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.25.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम्हारी लपटें प्रकाश वाली हैं. तुम सोमलता कुचलने वाले पत्थर के समान महान्‌ हो. तुम स्वयं द्योतमान हो. तुम्हारा शब्द मेघगर्जन के समान है. (८)

EN English Translation

O agni! Your flames are light. You are as great as a stone crushing somalta. You are self-indicative. Your word is like thunder. (8)

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