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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 28 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 28 • ऋचा / मन्त्र 6

5.28.6

Mantra ID: 5.28.6

आ जु॑होता दुव॒स्यता॒ग्निं प्र॑य॒त्य॑ध्व॒रे । वृ॒णी॒ध्वं ह॑व्य॒वाह॑नम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.28.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विजो! तुम हमारा यज्ञ आरंभ होने पर हव्य ढोने वाले अग्नि में हवन करो, उनकी सेवा करो, उन्हें प्राप्त करो एवं अपना हव्य देवों के समीप पहुंचाने के लिए उन्हें वरण करो. (६)

EN English Translation

Hey Ritvijo! When our yajna begins, do havan in the agni that carries the havan, serve them, receive them and select them to bring your vow to the gods. (6)

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