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5.29.1
त्र्य॑र्य॒मा मनु॑षो दे॒वता॑ता॒ त्री रो॑च॒ना दि॒व्या धा॑रयन्त । अर्च॑न्ति त्वा म॒रुतः॑ पू॒तद॑क्षा॒स्त्वमे॑षा॒मृषि॑रिन्द्रासि॒ धीरः॑ ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.29.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मनु के यज्ञ के तीन तेजों एवं अंतरिक्ष में होने वाले तीन प्रकाशयुक्तों को मरुतों ने धारण किया है. हे इंद्र! पवित्र-शक्ति वाले मरुत् तुम्हारी स्तुति करते हैं. हे धीर इंद्र! तुम इन्हें देखने वाले हो. (१)
EN English Translation
The three lights of Manu's yajna and the three light-bearings in space are held by the Maruts. O Indra! The holy-powered deserts praise you. O patient Indra! You're going to see them. (1)