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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 29 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 29 • ऋचा / मन्त्र 10

5.29.10

Mantra ID: 5.29.10

प्रान्यच्च॒क्रम॑वृहः॒ सूर्य॑स्य॒ कुत्सा॑या॒न्यद्वरि॑वो॒ यात॑वेऽकः । अ॒नासो॒ दस्यू॑ँरमृणो व॒धेन॒ नि दु॑र्यो॒ण आ॑वृणङ्मृ॒ध्रवा॑चः ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.29.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने सूर्य के रथ के एक पहिए को पहले ही अलग कर दिया था एवं दूसरा पहिया कुत्स को इसलिए दे दिया था कि वह धन पा सके. तुमने शब्द न करने वाले दस्युओं को संग्राम में वज्र द्वारा वाणीरहित करके मारा था. (१०)

EN English Translation

O Indra! You had already separated one wheel of the sun's chariot and gave the other wheel to the dog so that he could get money. You killed the non-wording bandits by a thunderbolt in the battle. (10)

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