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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 29 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 29 • ऋचा / मन्त्र 6

5.29.6

Mantra ID: 5.29.6

नव॒ यद॑स्य नव॒तिं च॑ भो॒गान्सा॒कं वज्रे॑ण म॒घवा॑ विवृ॒श्चत् । अर्च॒न्तीन्द्रं॑ म॒रुतः॑ स॒धस्थे॒ त्रैष्टु॑भेन॒ वच॑सा बाधत॒ द्याम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.29.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब धन के स्वामी इंद्र ने शंबर के निन्यानवे नगरों को वज्र द्वारा एक साथ नष्ट कर दिया था, तब मरुतों ने युद्धभूमि में ही त्रिष्टुप्‌ छंद द्वारा इंद्र की स्तुति की थी. इंद्र ने मरुतों की स्तुति से शक्तिशाली बनकर शंबर को बाधा पहुंचाई. (६)

EN English Translation

When Indra, the lord of wealth, had destroyed the ninety-nine cities of Shambar simultaneously with the thunderbolt, the Maruts praised Indra through the trishtupanda in the battlefield itself. Indra interrupted Sambar by becoming powerful with the praise of the Maruts. (6)

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