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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 30 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 12

5.30.12

Mantra ID: 5.30.12

भ॒द्रमि॒दं रु॒शमा॑ अग्ने अक्र॒न्गवां॑ च॒त्वारि॒ दद॑तः स॒हस्रा॑ । ऋ॒णं॒च॒यस्य॒ प्रय॑ता म॒घानि॒ प्रत्य॑ग्रभीष्म॒ नृत॑मस्य नृ॒णाम् ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.30.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! ऋणंचय राजा के सेवकों ने, जो रुशम देश के निवासी थे, मुझे चार हजार गाएं देकर भला काम किया था. सर्वश्रेष्ठ नेता ऋणंचय द्वारा दिए गए गोरूप धन को मैंने स्वीकार किया था. (१२)

EN English Translation

O agni! The servants of the indebted king, who were residents of the land of Rusham, had done a good job by giving me four thousand songs. I had accepted the gorup money given by the best leader loan. (12)

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