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5.30.14
औच्छ॒त्सा रात्री॒ परि॑तक्म्या॒ याँ ऋ॑णंच॒ये राज॑नि रु॒शमा॑नाम् । अत्यो॒ न वा॒जी र॒घुर॒ज्यमा॑नो ब॒भ्रुश्च॒त्वार्य॑सनत्स॒हस्रा॑ ॥ (१४)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.30.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
रुशम देश के राजा ऋणंचय के समीप ही मेरी वह गतिशील रात बीत गई थी. वेगवान् घोड़े के सामन शीघ्रतापूर्वक आने वाले वश्ु ऋषि ने चार हजार गाएं प्राप्त की थीं. (१४)
EN English Translation
That dynamic night of mine had passed near the debt of king of The Rusham country. The sage Vashu, who had come quickly to the salmon of the vegvan horse, had received four thousand cows. (14)