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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 31 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 31 • ऋचा / मन्त्र 6

5.31.6

Mantra ID: 5.31.6

प्र ते॒ पूर्वा॑णि॒ कर॑णानि वोचं॒ प्र नूत॑ना मघव॒न्या च॒कर्थ॑ । शक्ती॑वो॒ यद्वि॒भरा॒ रोद॑सी उ॒भे जय॑न्न॒पो मन॑वे॒ दानु॑चित्राः ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.31.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धन के स्वामी इंद्र! हम तुम्हारे पुराने और नए साहसपूर्ण कार्यो की स्तुति करते हैं. तुमने वे कर्म किए थे. हे वज्रवाले इंद्र! तुम धरती-आकाश को वश में करते हुए मनुष्यों के लिए विचित्र जलों को धारण करते हो. (६)

EN English Translation

O Lord of wealth Indra! We praise your old and new courageous deeds. You did those deeds. O Indra of Vajra! You possess strange waters for men, subduing the earth and the sky. (6)

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