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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 33 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 33 • ऋचा / मन्त्र 4

5.33.4

Mantra ID: 5.33.4

पु॒रू यत्त॑ इन्द्र॒ सन्त्यु॒क्था गवे॑ च॒कर्थो॒र्वरा॑सु॒ युध्य॑न् । त॒त॒क्षे सूर्या॑य चि॒दोक॑सि॒ स्वे वृषा॑ स॒मत्सु॑ दा॒सस्य॒ नाम॑ चित् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.33.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारे निजी स्तोत्र बहुत से हैं. तुम उपजाऊ धरती पर वर्षा के जल के निमित्त जल प्रतिबंधकों का नाश करते हो. कामवर्षी इंद्र! तुम सूर्य के स्थान अंतरिक्ष में वर्षा रोकने वाले राक्षसों के साथ युद्ध करके उनका नाम तक मिटा देते हो. (४)

EN English Translation

O Indra! There are many of your personal hymns. You destroy water restrictions for rain water on fertile earth. The working Indra! You even erase their names by fighting with monsters who stop raining in the sun's place space. (4)

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