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5.33.8
उ॒त त्ये मा॑ पौरुकु॒त्स्यस्य॑ सू॒रेस्त्र॒सद॑स्योर्हिर॒णिनो॒ ररा॑णाः । वह॑न्तु मा॒ दश॒ श्येता॑सो अस्य गैरिक्षि॒तस्य॒ क्रतु॑भि॒र्नु स॑श्चे ॥ (८)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.33.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
गिरिक्षित गोत्र में उत्पन्न पुरुकुत्स के पुत्र, स्वर्ण के स्वामी एवं प्रेरक त्रसदस्यु द्वारा दिए गए सफेद रंग के दस घोड़े हमारा रथ खींचें. रथ में घोड़े जोड़ने का काम हम शीघ्र कर लेंगे. (८)
EN English Translation
Draw our chariot ten white horses given by the son of Purukuts, the lord of gold and the apostle Trasadsyu, the son of purukuts born in the girakshit tribe. We will soon do the work of adding horses to the chariot. (8)