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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 34 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 34 • ऋचा / मन्त्र 2

5.34.2

Mantra ID: 5.34.2

आ यः सोमे॑न ज॒ठर॒मपि॑प्र॒ताम॑न्दत म॒घवा॒ मध्वो॒ अन्ध॑सः । यदीं॑ मृ॒गाय॒ हन्त॑वे म॒हाव॑धः स॒हस्र॑भृष्टिमु॒शना॑ व॒धं यम॑त् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.34.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने सोमरस से अपना पूरा पेट भर लिया था एवं वे मधुर सोमरस पीकर प्रसन्न हुए थे. इद्र ने मृग असुर को मारने के लिए अपने असीमित तेज वाले महान्‌ वज्र को उठाया था. (२)

EN English Translation

Indra had filled his entire stomach with somras and was happy to drink the sweet somras. Idra had picked up his infinitely sharp great vajra to kill the deer asura. (2)

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