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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 38 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 38 • ऋचा / मन्त्र 2

5.38.2

Mantra ID: 5.38.2

यदी॑मिन्द्र श्र॒वाय्य॒मिषं॑ शविष्ठ दधि॒षे । प॒प्र॒थे दी॑र्घ॒श्रुत्त॑मं॒ हिर॑ण्यवर्ण दु॒ष्टर॑म् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.38.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अतिशय बलवान्‌ एवं हिरण्यवर्ण वाले इंद्र! यद्यपि तुम प्रचुर अन्न देते हो, फिर भी वह सब जगह दुर्लभ कहा जाता है. (२)

EN English Translation

O Indra of the most strong and hiranyavarna! Although you give abundant food, it is still called rare all over the place. (2)

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