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5.4.1
त्वाम॑ग्ने॒ वसु॑पतिं॒ वसू॑नाम॒भि प्र म॑न्दे अध्व॒रेषु॑ राजन् । त्वया॒ वाजं॑ वाज॒यन्तो॑ जयेमा॒भि ष्या॑म पृत्सु॒तीर्मर्त्या॑नाम् ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.4.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे संपत्तियों के स्वामी अग्नि! हम तुम्हें लक्ष्य करके यज्ञो में स्तुति करते हैं. हे तेजस्वी अग्नि! हम अन्न के अभिलाषी तुम्हारी कृपा से अन्न प्राप्त करें एवं मानवों की सेना को जीते. (१)
EN English Translation
O agni, lord of the properties! We target you and praise you in the yajnas. O glorious agni! May we, the desires of food, receive food by your grace and conquer the army of men. (1)