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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 41 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 41 • ऋचा / मन्त्र 12

5.41.12

Mantra ID: 5.41.12

श‍ृ॒णोतु॑ न ऊ॒र्जां पति॒र्गिरः॒ स नभ॒स्तरी॑याँ इषि॒रः परि॑ज्मा । श‍ृ॒ण्वन्त्वापः॒ पुरो॒ न शु॒भ्राः परि॒ स्रुचो॑ बबृहा॒णस्याद्रेः॑ ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.41.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बल के स्वामी, आकाशचारी, अतिशय तरण वाले, गतिशील एवं चारों ओर जाने वाले वायु हमारी स्तुतियां सुनें. नगरों के समान शुभ्र एवं विशाल पर्वत के चारों ओर वाली जलधारा हमारी स्तुतियां सुने. (१२)

EN English Translation

Listen to our praises, the masters of force, the sky-bearers, the super-swimming, the moving and the wind that moves around. The waters around the great mountains, like the cities, hear our praises. (12)

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