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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 42 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 3

5.42.3

Mantra ID: 5.42.3

उदी॑रय क॒वित॑मं कवी॒नामु॒नत्तै॑नम॒भि मध्वा॑ घृ॒तेन॑ । स नो॒ वसू॑नि॒ प्रय॑ता हि॒तानि॑ च॒न्द्राणि॑ दे॒वः स॑वि॒ता सु॑वाति ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.42.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विजो! तुम क्रांतदर्शियों मे श्रेष्ठ एवं सामने वर्तमान अग्नि को प्रसन्न करो. हम इन्हें मधुर सोम एवं घृत द्वारा प्रसन्न करें. वे हमें हितकारक, उत्तम एवं प्रसन्नताकारक सोना दें. (३)

EN English Translation

Hey Ritvijo! You please the present agni in front of you and the best of the revolutionaries. Let us please them with sweet som and dhrit. They give us good, good and happy gold. (3)

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