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5.43.12
आ वे॒धसं॒ नील॑पृष्ठं बृ॒हन्तं॒ बृह॒स्पतिं॒ सद॑ने सादयध्वम् । सा॒दद्यो॑निं॒ दम॒ आ दी॑दि॒वांसं॒ हिर॑ण्यवर्णमरु॒षं स॑पेम ॥ (१२)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.43.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
शक्तिशाली, नीली पीठ वाले एवं महान् बृहस्पति को यज्ञशाला में बैठाओ. वे बीच में बैठकर पूरे घर में प्रकाश बिखेरते हैं, सुनहरे रंग वाले एवं तेजस्वी हैं तथा हमारे द्वारा पूजित हैं. (१२)
EN English Translation
Sit the mighty, blue-headed and great Jupiter in the yajnashala. They sit in the middle and scatter light throughout the house, are golden in coloured and bright and worshipped by us. (12)