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5.45.10
आ सूर्यो॑ अरुहच्छु॒क्रमर्णोऽयु॑क्त॒ यद्ध॒रितो॑ वी॒तपृ॑ष्ठाः । उ॒द्ना न नाव॑मनयन्त॒ धीरा॑ आशृण्व॒तीरापो॑ अ॒र्वाग॑तिष्ठन् ॥ (१०)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.45.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सूर्य दीप्तिशाली जल पर आरूढ़ होते हैं. सूर्य जब अपने रथ में सुंदर पीठ वाले घोड़ों को जोड़ते हैं, तब धीर यजमान उन्हें जल पर चलने वाली नाव के समान ले आते हैं एवं सूर्य की आज्ञा मानने वाली जलराशि झुक जाती है. (१०)
EN English Translation
The sun is covered on the radiant water. When the sun adds horses with beautiful backs to its chariot, the dhir host brings them like a boat on the water and the water body obeying the sun is bowed down. (10)