Popular:
ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 47 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 47 • ऋचा / मन्त्र 6

5.47.6

Mantra ID: 5.47.6

वि त॑न्वते॒ धियो॑ अस्मा॒ अपां॑सि॒ वस्त्रा॑ पु॒त्राय॑ मा॒तरो॑ वयन्ति । उ॒प॒प्र॒क्षे वृष॑णो॒ मोद॑माना दि॒वस्प॒था व॒ध्वो॑ य॒न्त्यच्छ॑ ॥ (६)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 5.47.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इसी सूर्य के लिए बुद्धिमान्‌ यजमान यज्ञकर्म आरंभ करते हैं. उषारूपी माताएं इसी के लिए तेजस्वी कपड़े बुनती हैं. वर्षाकारी सूर्य के मिलन से प्रसन्न पत्नीरूपी किरणें आकाश मार्ग से हमारे पास आती हैं. (६)

EN English Translation

For this sun, the wise people begin the yajnakarma. Ushari's mothers weave stunning clothes for this. Happy with the meeting of the rainy sun, the rays of the wife come to us from the way to the sky. (6)

卐 HinduText AI