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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 51 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 9

5.51.9

Mantra ID: 5.51.9

स॒जूर्मि॒त्रावरु॑णाभ्यां स॒जूः सोमे॑न॒ विष्णु॑ना । आ या॑ह्यग्ने अत्रि॒वत्सु॒ते र॑ण ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.51.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम मित्र, वरुण, सोम एवं विष्णु के साथ आओ तथा यज्ञ में निचोड़ा हुआ सोमरस पीकर अत्रि ऋषि के समान प्रसन्न बनो. (९)

EN English Translation

O agni! Come with your friends, Varuna, Som and Vishnu and drink the squeezed somers in the yagna and be as happy as sage Atri. (9)

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