Popular:
ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 52 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 11

5.52.11

Mantra ID: 5.52.11

अधा॒ नरो॒ न्यो॑ह॒तेऽधा॑ नि॒युत॑ ओहते । अधा॒ पारा॑वता॒ इति॑ चि॒त्रा रू॒पाणि॒ दर्श्या॑ ॥ (११)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 5.52.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वर्षा आदि इष्ट कार्यो के नेता देवगण संसार को धारण करते हैं. सबको मिलाने वाले जगत्‌ को धारण करते हैं. दूरवर्ती आकाश के ग्रह, तारों आदि को धारण करने वाले देवों का रूप विचित्र एवं दर्शनीय है. (११)

EN English Translation

The devas, the leaders of the desired works like rain, etc., hold the world. Those who unite all hold the world. The form of the gods holding the planets, stars, etc. of the distant sky is strange and visible. (11)

卐 HinduText AI