Popular:
ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 53 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 14

5.53.14

Mantra ID: 5.53.14

अती॑याम नि॒दस्ति॒रः स्व॒स्तिभि॑र्हि॒त्वाव॒द्यमरा॑तीः । वृ॒ष्ट्वी शं योराप॑ उ॒स्रि भे॑ष॒जं स्याम॑ मरुतः स॒ह ॥ (१४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 5.53.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! हम कल्याणों द्वारा पाप को त्यागकर निंदक-शत्रुओं पर विजय प्राप्त करें. तुम्हारे द्वारा की गई वर्षा से हम सुख, पापों का नाश, जल, गायां एवं ओषधियों को पावें. (१४)

EN English Translation

O Maruto! Let us give up sin through welfare and conquer cynic enemies. With the rain done by you, we should get happiness, destruction of sins, water, songs and medicines. (14)

卐 HinduText AI