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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 55 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 55 • ऋचा / मन्त्र 4

5.55.4

Mantra ID: 5.55.4

आ॒भू॒षेण्यं॑ वो मरुतो महित्व॒नं दि॑दृ॒क्षेण्यं॒ सूर्य॑स्येव॒ चक्ष॑णम् । उ॒तो अ॒स्माँ अ॑मृत॒त्वे द॑धातन॒ शुभं॑ या॒तामनु॒ रथा॑ अवृत्सत ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.55.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! तुम्हारी महत्ता प्रशंसनीय है एवं रूप सूर्य के समान सुंदर है. तुम हमें मरणरहित बनाओ. जल की ओर जाने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे चलता है. (४)

EN English Translation

O Maruto! Your importance is admirable and the appearance is as beautiful as the sun. You make us deathless. The chariot of the maruts going towards the water runs behind the back. (4)

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