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5.55.7
न पर्व॑ता॒ न न॒द्यो॑ वरन्त वो॒ यत्राचि॑ध्वं मरुतो॒ गच्छ॒थेदु॒ तत् । उ॒त द्यावा॑पृथि॒वी या॑थना॒ परि॒ शुभं॑ या॒तामनु॒ रथा॑ अवृत्सत ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.55.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे मरुतो! नदियां अथवा पहाड़ तुम्हें रोकने में समर्थ नहीं हैं. तुम जहां जाना चाहते हो, वहां अवश्य पहुंच जाते हो. वर्षा करने के लिए तुम धरती-आकाश में फैल जाते हो. जल की ओर जाने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे चलता है. (७)
EN English Translation
O Maruto! Rivers or mountains are not able to stop you. You must get to where you want to go. To rain, you spread out in the earth and the sky. The chariot of the maruts going towards the water runs behind the back. (7)