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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 61 • Mantra / Rik 18

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 18

5.61.18

Mantra ID: 5.61.18

उ॒त मे॑ वोचता॒दिति॑ सु॒तसो॑मे॒ रथ॑वीतौ । न कामो॒ अप॑ वेति मे ॥ (१८)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.61.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे रात्रिदेवी! सोमरस निचोड़ने वाले रथवीति से तुम यह कहना कि उसकी पुत्री के प्रति मुझ श्यावाश्व का लगाव कम नहीं हुआ है. (१८)

EN English Translation

O goddess of the night! You should say to the charioteer who squeezes somers that my love for his daughter has not diminished. (18)

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