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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 82 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 82 • ऋचा / मन्त्र 2

5.82.2

Mantra ID: 5.82.2

अस्य॒ हि स्वय॑शस्तरं सवि॒तुः कच्च॒न प्रि॒यम् । न मि॒नन्ति॑ स्व॒राज्य॑म् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.82.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सविता देव के स्वयंसिद्ध, परम प्रसिद्ध एवं सर्वप्रिय ऐश्वर्य को कोई नष्ट नहीं कर सकता. (२)

EN English Translation

No one can destroy the axiom, the most famous and the all-loving splendor of Savita Dev. (2)

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