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6.1.13
पु॒रूण्य॑ग्ने पुरु॒धा त्वा॒या वसू॑नि राजन्व॒सुता॑ ते अश्याम् । पु॒रूणि॒ हि त्वे पु॑रुवार॒ सन्त्यग्ने॒ वसु॑ विध॒ते राज॑नि॒ त्वे ॥ (१३)
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ऋग्वेद मन्त्र 6.1.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे धनयुक्त एवं तेजस्वी अग्नि! हम तुमसे अनेक प्रकार की संपत्ति प्राप्त करें. हे सर्वप्रिय अग्नि! हम तुमसे बहुत से धन पावें. (१३)
EN English Translation
O rich and glorious agni! We get many types of property from you. O beloved agni! We get a lot of money from you. (13)