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6.1.4
प॒दं दे॒वस्य॒ नम॑सा॒ व्यन्तः॑ श्रव॒स्यवः॒ श्रव॑ आप॒न्नमृ॑क्तम् । नामा॑नि चिद्दधिरे य॒ज्ञिया॑नि भ॒द्रायां॑ ते रणयन्त॒ संदृ॑ष्टौ ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 6.1.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अन्न चाहने वाले यजमान स्तुतियों के साथ अग्नि के स्थान में जाकर दूसरों द्वारा बाधारहित धन पाते हैं. हे अग्नि! तुम्हारा दर्शन हो जाने पर वे तुम्हारी स्तुतियों में आनंद पाते हैं एवं तुम्हारे यज्ञसंबंधी नामों को बोलते हैं. (४)
EN English Translation
Food seekers go to the place of agni with host hymns and find unhindered wealth by others. O agni! When you have a vision, they find joy in your praises and speak your sacrificial names. (4)